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उत्तर बंगाल की पहाड़ियों में लगातार भूस्खलन पर एनजीटी ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगी रिपोर्ट

उत्तर बंगाल की पहाड़ियों में लगातार भूस्खलन पर एनजीटी ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगी रिपोर्ट
 

31 Oct 2025

उत्तर बंगाल की पहाड़ियों में लगातार भूस्खलन पर एनजीटी ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगी रिपोर्ट

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर बंगाल की पहाड़ियों में लगातार हो रहे भूस्खलनों को लेकर केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इन भूस्खलनों के कारण साल भर के अलग-अलग समय पर वहां सामान्य जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है। एक अधिकारी ने शुक्रवार सुबह इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि एनजीटी की पूर्वी क्षेत्रीय पीठ में इस मामले की विस्तृत सुनवाई 22 दिसंबर को कोलकाता में होगी। तब तक केंद्र और राज्य सरकारों को अपनी-अपनी रिपोर्टें अधिकरण में जमा करनी होंगी।

एनजीटी ने जिन एजेंसियों से रिपोर्ट मांगी है, उनमें केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, गोविंद बल्लभ पंत हिमालयन पर्यावरण संस्थान और वाडिया हिमालयन भूविज्ञान संस्थान शामिल हैं। अधिकरण का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब इस माह की शुरुआत में भारी वर्षा और भूस्खलनों ने उत्तर बंगाल के पहाड़ी, तराई और डुआर्स क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई थी और कई लोगों की जान चली गई थी।

अधिकरण ने विभिन्न मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि पहाड़ियों में अंधाधुंध वनों की कटाई और अनियंत्रित रियल एस्टेट विकास गतिविधियां भूस्खलनों की मुख्य वजह बनती जा रही हैं। एनजीटी ने उत्तर बंगाल की पहाड़ियों को राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए इस दिशा में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। केंद्रीय सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने संभवतः केंद्र के उन चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ किया है जिनमें दार्जिलिंग जिले की पहाड़ियों में 2011 के बाद से वनों के तेजी से घटने पर चिंता व्यक्त की गई थी।

वन सर्वेक्षण विभाग (एफएसआई) की ओर से प्रकाशित इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2023 के अनुसार, दार्जिलिंग जिले में कुल वन क्षेत्र एक हजार 402.67 वर्ग किलोमीटर रह गया है, जबकि 2011 में यह दो हजार 289 वर्ग किलोमीटर था। इसका अर्थ है कि 2011 से लेकर 2023 तक दार्जिलिंग जिले में वन क्षेत्र में लगभग 31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। आईएसएफआर रिपोर्ट हर दो वर्ष में वन सर्वेक्षण विभाग, देहरादून (उत्तराखंड) द्वारा तैयार और प्रकाशित की जाती है।
 

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